प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को मुंबई और वड़ोदरा में सात रेजिडेंशियल एवं कॉमर्शियल परिसरों तथा तीन बैंक लॉकरों की तलाशी ली। यह कार्रवाई बिलपावर लिमिटेड से जुड़े 160.55 करोड़ के ऋण धोखाधड़ी मामले में धनशोधन की जांच के तहत की गई।
तलाशी अभियान धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत बिलपावर लिमिटेड के प्रमोटरों और उनसे जुड़ी सहयोगी कंपनियों के परिसरों पर चलाया गया। इस दौरान ED ने करीब 43.90 लाख रुपये की नकदी और लगभग 12.20 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण जब्त किए। इसके अलावा PMLA की धारा 17(1A) के तहत लगभग 27 लाख रुपये वाले दो बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। प्रमोटरों और उनसे जुड़ी संस्थाओं से संबंधित तीन बैंक लॉकरों को भी फ्रीज किया गया।
ED ने अचल संपत्तियों, जमीन और मशीनरी समेत परिसंपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए। इसके अलावा लेखा-पुस्तकें, लेजर, डिजिटल उपकरण और अन्य दस्तावेज मिले, जिन्हें एजेंसी ने मामले में आपत्तिजनक साक्ष्य बताया है।
ED का मामला दिल्ली स्थित CBI की आर्थिक अपराध शाखा-I द्वारा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR से जुड़ा है। इसके बाद CBI ने 30 सितंबर 2024 को बिलपावर लिमिटेड, उसके निदेशकों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोप है कि कंपनी ने ऋण से प्राप्त धन को धोखाधड़ीपूर्वक दूसरी जगह भेजा और अपने खातों में हेरफेर किया, जिससे बैंक को 160.55 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बिलपावर लिमिटेड ट्रांसफॉर्मर लैमिनेशन और कोर बनाने के कारोबार में थी। कंपनी का प्रबंधन राजेंद्र कुमार चौधरी, सुरेश कुमार चौधरी और नरेश कुमार चौधरी करते थे। कंपनी का 2005 से SBI के साथ बैंकिंग संबंध था। उसे कैश क्रेडिट, कार्यशील पूंजी और टर्म-लोन जैसी सुविधाएं मिली हुई थीं। इसके अलावा बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट जैसी गैर-निधि आधारित सुविधाएं भी उपलब्ध थीं। 18 अप्रैल 2012 को कंपनी के ऋण खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित किया गया था और उस समय मूलधन के रूप में 160.55 करोड़ रुपये बकाया था।
ED की जांच में सामने आया कि बिलपावर लिमिटेड ने शेल और फर्जी कंपनियों के साथ लेन-देन किया, जिनका इस्तेमाल बैंक के धन को दूसरी जगह भेजने और फिर उसे घुमाकर वापस लाने के लिए किया गया। आरोप है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर इन संस्थाओं के पक्ष में लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) जारी किए गए और उन दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल किया गया। इसके बाद धन को कथित रूप से चौधरी परिवार के सदस्यों या उनके सहयोगियों के नियंत्रण वाली विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से भेजा गया।
कंपनी की वित्तीय परेशानियों के कारण उसके खिलाफ दिवाला प्रक्रिया भी शुरू हुई। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT), मुंबई ने 2021 में बिलपावर के खिलाफ SBI की दिवाला याचिका स्वीकार कर ली, जिसके बाद कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में कंपनी परिसमापन (liquidation) में चली गई। इसके बाद से बिलपावर की संपत्तियों को बेचने के लिए कई ई-नीलामी के प्रयास किए जा चुके हैं। इनमें कंपनी को एक चालू व्यवसाय के रूप में बेचने के साथ-साथ उसकी अलग-अलग संपत्तियों और अन्य परिसंपत्तियों को बेचने के प्रयास भी शामिल हैं। बैंक धन के दुरुपयोग की ED की PMLA जांच के साथ-साथ परिसमापन की कार्यवाही भी जारी है।
